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      2016-05-25
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      बांसवाड़ा २० मई २०१६
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      2016-03-28
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      अखिल राजस्थान रावणा राजपूत महासभा ( युवा प्रकोष्ठ ) भीलव...  More....

Welcome To Rawna Rajput

        प्राचीनकाल में राजा के अनेक पुत्र होते थे और राजपूतों में राज्य विभाजन नहीं होता था। अतः राजा का ज्येष्ठ पुत्र ही राज्य का उत्तराधिकारी होता था और वह राजा कहलाता था। उसके शेष पुत्र राजा के पुत्र होने के कारण राजपुत्र कहलाते थे। कालांतर में राजपुत्र शब्द समूह वाचक या जातिवाचक बन गया और राजपूत कहलाने लगे। पिता की मृत्यु  के बाद बड़ा भाई तो राजा बन गया और शेष छोटे भाई राजा की ही सेवा में विभिन्न पदों पर कार्य करने लगे राजा भी महत्वपूर्ण एवं जिम्मेदारी वाले पदों पर अपने विश्वसनीय एवं वफ़ादार लोगों को ही रखता था और उसके छोटे भाइयों से बढ़कर विश्वसनीय और वफ़दार अन्य कौन हो सकता था ? अतः राज्य के श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण पदों यथा जैसे - राजस्व की वसूली करना, सेना का नेतृत्व करना, राज्य के विद्रोह को दबाना, राजा का विश्वसनीय अंगरक्षक, रनिवास की चैकीदारी करना आदि-आदि कार्य उसी के छोटे भाई करते थे। “इस प्रकार राजा का बड़ा पुत्र तो उत्तराघिकारी होने से राजपूत बन गया और उसी के छोटे भाई रावल कहलाने लगे। यह ’रावल’ एक पदवी होती थी और ’रावल’ का रूप बिगड़कर ’रावला’ हो गया और इसी का अपभ्रंस ’रावणा’ हो गया।

 

 

 

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